Thursday, April 15, 2021

Dr Babasaheb Ambedkar Jayanti 2021: भीमराव आंबेडकर के धर्म, समाज और शिक्षा को लेकर यह थे विचार

 Ambedkar Jayanti 2021: 14 अप्रैल को भारत के पहले कानून मंत्री डॉ. भीमराव आंबेडकर के जन्मदिवस के रूप में मनाते हैं। इस वर्ष उनकी 130वीं जयंती मनाई जा रही है। डॉ. भीमराव आंबेडकर का बचपन संघर्ष में बीता। बहुत सी कठनाईयों के बावजूद उन्होंने कोलंबिया यूनिवर्सिटी और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। आज जानते हैं भीमराव आंबेडकर के धर्म, समाज और शिक्षा को लेकर क्या थे विचार


शिक्षा जितनी पुरूषों के लिए आवशयक हैउतनी ही महिलाओं के लिए...

                                                                         - डॉ. भीम राव अम्बेडकर

कानून  और  व्यवस्था  राजनीतिक  शरीर  की  दवा  हैऔर  जब  राजनीतिक  शरीर बीमार  पड़ेतो  दवा  जरूर  दी  जानी  चाहिए। - डॉ. भीम राव अम्बेडकर


बुद्धि का विकास मानव के अस्तित्व का अंतिम लक्ष्य होना चाहिए। - डॉ. भीम राव अम्बेडकर


जीवन  लम्बा  होने  की  बजाये  महान  होना  चाहिए।
 - डॉ. भीम राव अम्बेडकर

32 डिग्रियां और 9 भाषाओं के ज्ञाता थे डॉ. आंबेडकर, 8 साल की पढ़ाई 2 साल 3 महीने में की थी पूरी


डॉ. भीमराव आंबेडकर भारत रत्न से नवाजित हैं। हमारे देश को एक सफल लोकतंत्र बनाकर इन्होंने देशवासियों को सबसे बड़ी संपत्ति दी। हम इस वर्ष
14 अप्रैल को उनकी 130वीं जयंती मना रहे हैं। आज पूरा देश लॉकडाउन है ऐसे में लोगों का मनोबल कमजोर पड़ता जा रहा है। अंबेडकर की कहानी न केवल लोगों का आत्मविश्वास बढ़ाएगी बल्कि उनके मनोबल को और मजबूत करेगी। आगे पढ़ते हैं इनकी शिक्षा और कुछ जरूरी तथ्यों को बारे में। 

आंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल, 1891 महाराष्ट्र के सैन्य छावनी (महाराष्ट्र में स्वतंत्रता से पहले, अब मध्य प्रदेश में स्थित है) में हुआ था। अब इस नगर को डॉ. आंबेडकर नगर के रूप में भी जाना जाता है। 

14 साल की उम्र में डॉ. बी आर आंबेडकर का विवाह रमाबाई से हुआ। हालांकि, लंबी बीमारी के बाद मात्र 37 वर्ष की उम्र में 27 मई, 1935 को रमाबाई आंबेडकर की मृत्यु हो गई।   

इसके बाद, डॉ. बी.आर. आंबेडकर ने सविता आंबेडकर से विवाह किया। सविता अंबेडकर, जो मूल रूप से एक ब्राह्मण परिवार से थीं, डॉ. बी. आर. आंबेडकर के साथ बौद्ध धर्म में परिवर्तित हो गईं। वर्ष 2003 में उनका भी निधन हो गया।



इनकी शिक्षा...

डॉ. बी.आर. आंबेडकर 64 विषयों में मास्टर थे। उन्हें 9 भाषाओं का ज्ञान था। साथ ही इनके पास कुल 32 डिग्रियां थीं।

इसके अलावा, उन्होंने लगभग 21 वर्षों तक दुनिया के सभी धर्मों का तुलनात्मक तरीके से अध्ययन किया।

उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में सिर्फ 2 साल 3 महीने में 8 साल की पढ़ाई पूरी की।


वह लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से "डॉक्टर ऑफ साइंस" नामक एक मूल्यवान डॉक्टरेट की डिग्री प्राप्त करने वाले दुनिया के पहले और एकमात्र व्यक्ति हैं।



डॉ. बी.आर. आंबेडकर की दुनिया में सबसे ज्यादा प्रतिमाएं हैं।

1950 में, उनकी पहली प्रतिमा कोल्हापुर शहर में बनाई गई थी। डॉ. बी.आर. आंबेडकर एकमात्र भारतीय हैं, जिनकी प्रतिमा लंदन संग्रहालय में कार्ल मार्क्स के साथ लगी हुई है।



भारतीय तिरंगे पर "अशोक चक्र" को जगह देने का श्रेय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर को ही जाता है।



उनकी पुस्तक "वेटिंग फॉर ए वीजा" कोलंबिया विश्वविद्यालय में एक पाठ्यपुस्तक है।

दुनिया भर में, किसी भी नेता के नाम पर सबसे अधिक गाने और किताबें डॉ. बी. आर. अंबेडकर के नाम पर लिखी गई हैं।

दुनिया भर में बुद्ध की सभी प्रतिमाओं और चित्रों में बुद्ध की आंखें बंद हैं, लेकिन डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने बुद्ध की पहली पेंटिंग बनाई, जिसमें बुद्ध की आंखें खुली थीं।

आंबेडकर ने 6 दिसंबर, 1956 को नई दिल्ली में अपनी अंतिम सांस ली, जहां उन्हें बौद्ध अंतिम संस्कार दिया गया था।

1990 में, आंबेडकर को मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।

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