क्या है देवशयनी एकादशी और क्या है इसका महत्व?
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सनातन धर्म में एकादशी का खासा महत्व है। ये दिन पुण्य कार्य और ईश्वर की भक्ति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी और हरिशयनी एकादशी भी कहा जाता है।
पुराणों में इस एकादशी को सौभाग्य प्रदान करने वाली एकादशी बताया गया है। देवशयनी एकादशी के दिन से अगले 4 महीने के लिए भगवान विष्णु निद्रा में चले जाते हैं। सनातन धर्म में भगवान विष्णु के निद्रा में चले जाने की वजह से सभी मांगलिक कार्य बंद हो जाते हैं।
पद्म पुराण में बताया गया है कि इस दिन जो भी भक्त उपवास रखता है और पूरे विधि-विधान के साथ पूजा अर्चना करता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है और सभी पापों से भी मुक्ति मिलती है।
शास्त्रों के मुताबिक, देवशयनी एकादशी के दिन से ही चातुर्मास प्रारंभ हो जाता है और सभी 16 संस्कार अगले 4 महीने के लिए रुक जाते हैं। हालांकि घर में चलने वाले दैनिक पूजा-पाठ, अनुष्ठान, गृहप्रवेश, गाड़ी खरीदना जैसे शुभ कार्य किये जा सकते हैं।

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