Publish Date:Mon, 14 Sep 2020 9:49 PM (IST)
नई दिल्ली, साइन्स
अकादमी डेस्क। Hindi Diwas 2020: 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा में एक मत से हिंदी को
राजभाषा घोषित किया गया था और इसके बाद से हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।
हिंदी
भाषी क्षेत्रों में भी आजकल अंग्रेजी हावी होती जा रही है। आज हम हिंदी से ज्यादा
अंग्रेजी बोलने में गर्व महसूस करते हैं.। क्यों स्टेज पर नमस्ते की जगह
रेस्पेक्टेड एवरीवन ने ले ली है। हिंदी दिवस (14 सितंबर) के मौके पर जानेंगे इन दिन से जुड़ी
वो सभी बातें जिसे हर हिंदुस्तानी को जानना चाहिए और इस पर गर्व भी होना चाहिए।
हिंदी दिवस का इतिहास
अंग्रेजी
भाषा के बढ़ते चलन और हिंदी की अनदेखी को रोकने के लिए हर साल 14 सितंबर को देशभर में हिंदी
दिवस मनाया जाता है।आजादी मिलने के दो साल बाद 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा में एक मत से हिंदी को
राजभाषा घोषित किया गया था और इसके बाद से हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाने
लगा। दरअसल 14
सितम्बर
1949
को
हिन्दी के पुरोधा व्यौहार राजेन्द्र सिंहा का 50-वां जन्मदिन था, जिन्होंने हिन्दी को
राष्ट्रभाषा बनाने के लिए बहुत लंबा संघर्ष किया । स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद
हिन्दी को राष्ट्रभाषा के रूप में स्थापित करवाने के लिए काका कालेलकर, मैथिलीशरण गुप्त, हजारीप्रसाद द्विवेदी, महादेवी वर्मा, सेठ गोविन्ददास आदि
साहित्यकारों को साथ लेकर व्यौहार राजेन्द्र सिंहा ने अथक प्रयास किए। इसके चलते
उन्होंने दक्षिण भारत की कई यात्राएं भी कीं और लोगों को मनाया।
हिंदी दिवस का महत्व
आजादी
के कुछ साल बाद,
भारत
की नई चुनी हुई सरकार इस विशाल देश में निवास करने वाले असंख्य भाषाई, सांस्कृतिक और धार्मिक
समूहों को एक साथ मिलाने का प्रयास कर रही थी। क्योंकि देश के पास स्वयं की कोई
राष्ट्र भाषा नहीं थी,
इसलिए
प्रशासन द्वारा यह निर्णय लिया गया कि हिंदी वह भाषा बन सकती है। यह उस समय एक सरल
और बेहतरीन समाधान साबित हुआ।ऐेसे मनाया जाता है यह दिन
कई
स्कूल,
कॉलेज
और कार्यालय इस दिन महान उत्साह के साथ मनाते हैं। कई लोग हिंदी भाषा और भारतीय
संस्कृति के महत्व के बारे में बात करने के लिए आगे आते हैं। स्कूल हिंदी बहस, हिन्दी दिवस पर कविता और
कहानी कहने वाली प्रतियोगिताओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की मेजबानी करते हैं।
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